चालू खाता नियम

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बैंक ऑफ़ बड़ौदा चालू खाता खोलें.

चालू खाता नियम

चालू खाता कौन खोल सकता है

कोई भी जो करार कर सकता है और बैंक को जिसका संतोषजनक तरीके से परिचय कराया गया है, उसके अपने नाम पर खाता खोल सकता है. व्यक्ति इस तरह का मात्र एक खाता खोल सकता है. दो या अधिक व्यक्तियों के नाम पर खाते खोले जा सकते हैं, जो निम्न प्रकार से देय होंगे :

  • खाताधारकों में से कोई एक या एक से अधिक.
  • जीवित में से कोई एक या एक से अधिक.
  • कोई एक या एक से अधिक या सभी जीवित संयुक्त रूप से या जीवित.
  • 'पहले नाम का व्यक्ति या जीवित' या 'बादवाले नाम का व्यक्ति या जीवित' , बशर्ते यह कि दूसरे नाम का खाताधारक ('बाद वाले नाम का व्यक्ति या जीवित' के मामले में पहले नाम का व्यक्ति) खाते में जमा शेष का तभी हकदार होगा, जब पहले नाम के खाताधारक का ('बाद वाले नाम का व्यक्ति या जीवित' के मामले में दूसरे नाम का व्यक्ति) देहावसान हो जाए.

एकल स्वामित्ववाले फर्म, भागीदारी फर्म, प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक लिमिटेड कंपनी, संयुक्त हिन्दू परिवार, न्यास, क्लब, सहयोगी इत्यादि के लिए खाते खोले जा सकते हैं, जिनका समुचित परिचय बैंक को कराया गया है. खाता खोलने से पूर्व निर्धारित कार्यप्रणालियों की पूर्ति करना तथा आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक होगा.

14 वर्ष तथा इससे अधिक आयु के अवयस्कों के खाते उनके एकल नाम पर खोले जा सकते हैं, बशर्ते वे पढ-लिख सकते हों.

चालू खाता कैसे खोला जाए

खाता खोलने के लिए बैंक के खाता खोलने के निर्धारित आवेदन फार्म में आवेदन करना चाहिए.सभी हस्ताक्षरकर्ताओं को स्वयं शाखा में आकर खाता खोलने के फार्म पर हस्ताक्षार करने होंगे. भावी खाताधारक के संगठन के प्रकार के अनुसार आवश्यक प्रमाण बैंक को प्रस्तुत करने होंगे.

हर आवेदक को इस आशय के घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने होंगे कि उन्होंने चालू खाते के विषय में नियमों को पढा और स्वीकार किया है. नियमों की प्रति नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जाती है.

हर खाताधारक, स्वामी / भागीदार / कंपनी / पदाधिकारी / न्यास के निदेशक और अन्य अधिकारी, जिन्हें खाते के परिचालनों के लिए प्राधिकृत किया हो, की पासपोर्ट आकर की अद्यतन फोटो बैंक को देना आवश्यक होगा.

पिछले कम से कम -6- महीनों से बैंक के साथ संतोषजनक व सक्रिय तरीके से खाता परिचालित करनेवाले और जिसमें केवायसी मानदण्डों का भली भांति अनुपालन किया गया है, ऐसे वर्तमान चालू खाता / नकद त्रण खाताधारक द्वारा खाते का परिचय दिया गया हो.

पासबुक / खाते का विवरण

हर खाताधारक को हर माह कम्प्यूटर जनित विवरण दिया जाता है. जिसमें भुगतान की गई सभी राशियों और सभी आहरित चेकों का पूरा रिकार्ड शामिल होता है. ग्राहक को विवरण प्राप्त होने पर एसे विवरण मे दी गई प्रविष्टियों की सावधानी से जांच करनी चाहिए और कोई गलती या त्रुटि दिखाई देने पर उसे तुरन्त बैंक के ध्यान में लाया जाना चाहिए. अन्यथा यह मान लिया जाएगा कि खाते का विवरण सही एवं यथायोग्य है. उपरोक्तानुसार सावधानी लेने में ग्राहक की दुर्लक्षिता की वजह से हुए किसी नुकसान के लिए बैंक जिम्मेदार नहीं होगा.

यह समझना होगा कि यद्यपि खाते के क्रेडिट में जमा प्रविष्टियां की गई हैं और अधिकारी द्वारा पासबुक में इन प्रविष्टियों के सामने आद्याक्षर किया हैं, लेकिन यदि ये क्रेडिट प्रविष्टियां उगाही किए जानेवाले चेकों की हैं, तो प्रदर्शित राशि का आहरण तबतक नहीं किया जा सकता, जबतक कि उनकी प्राप्तियां वास्तव में बैंक के पास नहीं आती.

जमा - क्रेडिट

(क्षेत्र कोई भी हो) तिमाही औसत शेष : व्यक्तियों तथा गैर-व्यक्तियों के लिए- रु. 10,000/-.

  • व्यक्ति द्वारा तथा अन्यों के द्वारा भी न्यूनतम रु. 10000/- के आरंभिक जमा के साथ, क्षेत्र कोई भी हो, चालू खाता खोला जा सकता है.
  • खाते में किए गए सभी भुगतान जमा पर्ची के साथ किए जाएंगे. जमा पर्ची ग्राहकों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है. निम्न के लिए अलग अलग जमा पर्ची का इस्तेमाल किया जाए.

नकद

  • हमारी शाखाओं पर आहरित स्थानीय चेक / लाभांशपत्र इत्यादि
  • अन्य बैंकों पर आहरित स्थानीय चेक / लाभांशपत्र इत्यादि
  • बाहरी स्थानों के चेक, लाभांशपत्र, ड्राफ्ट इत्यादि, जो ऐसे बाहरी केन्द्रों पर आहरित हों, जहां बैंक की कोई शाखा नहीं है, उनकी उगाही ग्राहक की जिम्मेदारी पर की जाएगी और किसी भी एजेंट के कोई भी कार्य, दुर्लक्ष्य या दिवालियेपन के लिए बैंक जिम्मेदार नहीं होगा.
  • क्लियरिंग बैंकों पर आहरित चेक इत्यादि, यदि निर्धारित समय के बाद प्राप्त होते हैं तो उन्हें अगले कार्य-दिवस पर पारित किया जाएगा. अन्यथा देय स्थानीय बिल, जिनका भुगतान मांग पर नहीं किया जाता, को देय तारीख से कम से स्पष्टत: एक दिन पहले भेजा जाए. मांग बिल (हुंडी) को उसी दिन पर प्रस्तुति के निर्धारित समय के बाद प्रस्तुत न किया जाए. शनिवार को प्रस्तुत हुंडियों को अगले कार्यदिवस पर प्रस्तुत किया जाएगा.
  • जहां परिचयकर्ता व्यक्ति ने स्वयं बैंक में आकर परिचय न दिया हो, ऐसे नये खोले गए खाते में, जब तक परिचयकर्ता से पुष्टि प्राप्त नहीं होती तब तक उन खातों में वसूली के लिए चेक स्वीकार नहीं किए जाएंगे.

चेक द्वारा आहरण

पहली चेकबुक नि:शुल्क दी जाएगी और उसके बाद की मायकर / नॉन मायकर चेक बुकों के लिए प्रत्ये चेक पन्ने के लिए रु. 2.50 की दर से शुल्क लिया जाएगा. (नोट करें: पहली चेकबुक यानी 50 पन्नों की चेक बुक) बैंक द्वारा दिए गए छपे हुए चेकों का ही प्रयोग किया जाना चाहिए. अन्यथा आहरित चेकों के भुगतान से इन्कार करने का बैंक को अधिकार है. चेक बुक के लिए आवेदन स्वयं ग्राहक द्वारा लिखित रूप में ही किया जाएगा. नये चेक बुक की आवश्यकता पड़ने पर पहली चेकबुक में समाविष्ट छपे हुए चेकबुक मांग-फार्म का ही उपयोग किया जाए. जालसाजी, धोखाघड़ी इत्यादि को रोकने के लिए ग्राहकों से खास तौर पर अनुरोध किया जाता है कि :

चेक बुक को ताले में सुरक्षित रखें.

चेक को सुपुर्द करने से पहले उसकी रिक्तियां भरी जाएं.

राशि शब्दों में लिखते समय शब्दों को ''रुपये'' शब्द के करीब लिखें और आंकड़ों में राशि भी 'रु.' शब्द के पास लिखें.

चेक पर लिखी जानेवाली जानकारी स्पष्ट और पाठनीय हो और चेक इस प्रकार आहरित किया जाए कि जिससे इसे जारी किए जाने के बाद इसमें परिवर्तन करना या जोड़ना संभव न हो.

चेकों में राशि अक्षरों और आकंडों दोनों में लिखी जाए.

चेक में किए गए परिवर्तन आहर्ता द्वारा पूरे हस्ताक्षर करते हुए अधिप्रमाणित किए जाएं, अन्यथा चेक का भुगतान नहीं किया जाएगा.

जिन चेकों के हस्ताक्षर बैंक के रिकार्ड में उपल्बध हस्ताक्षर से हूबहू मेल नहीं खाते होंगे, उनका भुगतान नहीं किया जाएगा.

चेकों का नकद भुगतान करने के लिए बैंक चेक के प्रस्तुतकर्ता की उचित पहचान की मांग की सकता है.

उत्तर दिनांकित चेक यानी जिन पर चेक प्रस्तुत करने के तारीख के बाद की तारीख हो, का भुगतान नहीं किया जाएगा. प्रस्तुति की तारीख से छ: महीने पहले की तारीख वाले चेकों का भुगतान नहीं किया जाएगा.

ग्राहकों से अनुरोध है कि वसूली के लिए प्रस्तुत किए जानेवाले चेक अपने खाते में जमा कराने से पहले उन्हें रेखित करें.

चेक का भुगतान रोकने के लिए चेक के आहर्ता से अनुदेश को बैंक द्वारा दर्ज कराया जाएगा.

खाते में पर्याप्त शेष रखे बगैर चेक जारी करने के लिए परक्राम्य लिखत अधिनियम के खण्ड 138 के तहत दण्ड लगाया जा सकता है.

खाते में पर्याप्त निधि का प्रावधान किए बगैर चेक जारी नहीं किया जाना चाहिए. यदि पर्याप्त निधि का प्रावधान किए बगैर चेक को प्रस्तुत किया जाता है, तो चेक का भुगतान नहीं किया जाएगा और चेक वापस भेजा जाएगा. इन अनुदेशों की लगातार अवहेलना की जाने जी स्थिति में खाते को बंद किया जा सकता है.

बैंक के साथ निर्धारित व्यवस्था के तहत ही खाते में अति आहरण किया जा सकता है. किसी भी स्थिति में अवयस्क के खातों में अति आहरण की अनुमति नहीं होगी.

अनधिकृत व्यक्ति चेकों की उगाही न कर सके इसलिए सावधानी के तौर पर फर्म या लिमिटेड कंपनी को देय चेक ''धारक को देय'' होने पर भी इन्हें व्यक्तिगत खाते में जमा कराने के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा, जबतक कि इसे आदाता द्वारा चेक को प्राप्त करनेवाले व्यक्ति के पक्ष में इसे परांकित नहीं किया हो. यदि चेक प्राप्तकर्ता आदाता फर्म के भागीदार हैं या कंपनी के निदेशक हैं, तो उस चेक के वसूलीकर्ता भागीदार या निदेशक को छोड़ कर अन्य भागीदार या निदेशक के हाथ से परांकन किया गया होना चाहिए.

ब्याज

भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्देशनुसार बैंक के स्टाफ सदस्यों सहित किसी भी चालू खाते में जमाशेष पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता. तथापि, दिवंगत व्यक्तिगत खाताधारक के खाते में उसकी मृत्यु की तारीख से उसके कानूनी वारिसों को भुगतान किए जाने तक बचत खाते की दर से सरल ब्याज दिया जाएगा. एकल स्वामित्ववाली फर्म के खाते में भी एकल स्वामी की मृत्यु पर इसी तरह ब्याज अदा किया जाएगा.

स्थायी अनुदेश

बीमा प्रीमियम इत्यादि के लिए बैंक खाताधारकों से स्थायी अनुदेश स्वीकारता है. इसके लिए अन्य शाखा के साथ अन्य खाते में जमा के लिए प्रति संव्यवहार रु. 20/- (+सेवा कर) लिया जाता है. यदि संव्यवहार अन्य बैंक के साथ एक ही केन्द्र पर या बाहरी केन्द्र से संबद्ध होगा, तो निर्धारित दरों से प्रेषण प्रभार के अलावा वास्तविक डाक खर्चे / कूरियर खर्चे अतिरिक्ति रूप से लिए जाएंगे. खाते में अपर्याप्त जमा शेष की वजह से स्थायी अनुदेश का पालन नहीं किया जा सके, ऐसे हर प्रसंग में प्रभार रु. 20/- (+सेवा कर) लिए जाएंगे.

खाता बंद करना

खाते के बंद करने की अपनी इच्छा की सूचना खाताधारक को लिखित रूप में प्रस्तुत करनी होगी. भागीदारी फर्म और संयुक्त खातों के मामलों में लिखित अनुरोध को सभी भागीदारों और खाताधारकों द्वारा हस्ताक्षरित किया जाना चाहिए. लिमिटेड कंपनियों के मामले में, खाते को बंद करने को प्राधिकृत करने के विषय में निदेशक मंडल के संकल्प की प्रति भी आवश्यक होगी.

ग्राहक के पास उपयोग में न लाए गए चेक पन्ने, डेबिट कार्ड हैं, तो इन्हें बैंक को वापस किया जाए.

खाते का अद्यतन विवरण भी प्रस्तुत किया जाए.

यदि खाता एक वर्ष के भीतर बंद किया जाता है तो बैंक व्यक्ति से रु. 75/- (+सेवा कर) और अन्यों से 100/- (+सेवा कर) वसूल करेगा.

खाताधारक के हस्ताक्षर

हर खाताधारक को अपने हस्ताक्षर का नमूना बैंक के रिकार्ड के लिए देना होगा. खाता खोलने के समय बैंक के प्राधिकृत अधिकारी की उपस्थिति में हस्ताक्षर करने होंगे.

आहरण के सभी अनुदेश, चेक और बैंक को भेजे जाने वाले पत्र आदि पर हस्ताक्षर शाखा के रिकार्ड पर उपलब्ध नमूना हस्ताक्षर के अनुसार ही होने चाहिए.

नामांकन सुविधा

व्यक्तिगत खाताधारक और एकल स्वामित्ववाली कंपनियों को नामांकन करने, परिर्वतन करने या बदलने की सुविधा होगी.

सेवा प्रभार

वर्तमान में लागू सेवा प्रभारों के लिए कृपया हमारी वेबसाइट पर सेवा प्रभार देखें

लेनदेन के नियम

  • 1. मूल शाखा और गैर मूल शाखा (स्थानीय) में नकद जमा: मूल शाखा अर्थात वह शाखा जहां ग्राहक का खाता है और गैर मूल शाखा अर्थात उसी केंद्र पर मूल शाखा के अलावा अन्य शाखा में रति खाता प्रति दिन 5,000/- रु. तक प्रभार मुक्त. उसके बाद प्रभार योग्य.

    बाहरी केन्द्रों स्थित गैर मूल शाखा पर नकद जमा- प्रति खाता प्रति दिन 25,000/- रु. तक प्रभार मुक्त, उसके बाद प्रभार योग्य.

    • नकद आहरण - मूल शाखा में - कोई सीमा नहीं
    • बाहरी केन्द्रों पर स्थित गैर मूल शाखाओं में नकद आहरण (स्थानीय एवं बाहरी)
      • केवल स्वयं के लिए - प्रति लेनदेन रु. 50,000/- तक.
      • मूल शाखा पर अंतरण-लेनदेन - बिना किसी सीमा के पूरी अनुमति.
  • गैर मूल शाखा (स्थानीय और बाहरी केन्द्रों पर स्थित) में अंतरण-लेनदेन
  • सामान्यतः केवल उसी शाखा पर स्वीकार्य, जहां आहरणकर्ता या अदाकर्ता का खाता है. हालांकि, वास्तविक व्यवसाय संबंधी लेनदेन के लिए शाखा प्रमुख कुछ शर्तों के अधीन मामले दर मामले के अनुसार गैर मूल शाखा पर लेनदेन की अनुमति देने के लिए अधिकृत हैं.

  • समाशोधन-लेनदेन - समाशोधन-लेनदेन के लिए कोई सीमा नहीं है
  • खातों को अपरिचालित/निष्क्रिय होने से बचाने के लिए ग्राहकों को नामे या जमा लेनदेन करने के लिए सूचना दी जाती है. भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार यदि किसी बचत खाते में 2 वर्ष से अधिक समय से कोई परिचालन नहीं हुआ है तो ऐसे खाते को अपरिचालित/ निष्क्रिय माना जाएगा.

    किसी खाते को अपरिचालित खाते के रुप में वर्गीकृत करने के लिए दोनों तरह के लेनदेन अर्थात् नामे और जमा लेनदेन को ध्यान में लिया जाता है और यह भी ध्यान में लिया जाता है कि लेनदेन ग्राहक की ओर से किए गए थे या किसी तीसरी पार्टी के द्वारा. हालांकि, बैंक द्वारा प्रभारित सेवा प्रभार या बैंक द्वारा जमा किया गया ब्याज मान्य नहीं है. सावधि जमाओं के लिए जमा खातों में जमा किए जाने वाले मासिक और तिमाही ब्याज को इस उद्देश्य से ग्राहक द्वारा किया गया लेनदेन माना जाएगा.

    बैंक में ऐसे खाते निष्क्रिय (INACTIVE) स्थिति दर्शाते हुए रखे जाते हैं. जब खाता निष्क्रिय होता है तो केवल जमा लेनदेन ही संभव है. नामे लेनदेन के लिए खाते का सक्रिय होना जरुरी है. ऐसे खातों को सक्रिय करने के लिए ग्राहक को खाते को सक्रिय करने संबंधी आवेदन, नए केवायसी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे और खाते में कुछ लेनदेन करना होगा.

नियम में संशोधन और परिवर्तन

बैंक को बिना नोटिस के किसी भी समय पर इन नियमों को संशोधित करने या परिवर्तित करने का अधिकार है.

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