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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q

1. डीपी का चयन कैसे कर सकते हैं? क्या सभी डीपी एक जैसे होते हैं?

कोई भी व्यक्ति किसी भी सीबीएस शाखा (जो डीमैट खाते खोलने के लिए अधिकृत है) का चयन कर सकता है, बिल्कुल उसी तरह जैसे कि कोई व्यक्ति बचत खाता खोलने के लिए किसी शाखा का चयन करता है. चयन करने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण कारक हो सकते हैं:

  • सुविधा - कार्यालय/ निवास, व्यावसायिक परिसर के निकटतम और डीपी का कार्यसमय.
  • दी जाने वाली सेवाएं और उनकी गति.
  • लागत - हमारे द्वारा लगाए जाने वाले सेवा शुल्क बहुत प्रतिस्पर्धी हैं.

सभी डीपी एक जैसे हैं परंतु उपरोक्त पहलुओं में अलग-अलग हो सकते हैं.

Q

2. किसी व्यक्ति को हमारे बैंक की चयनित सीबीएस शाखा में डीमैट खाता खोलने के लिए क्या करना चाहिए?

वह अपनी पसंद की हमारी किसी भी चयनित सीबीएस शाखा से संपर्क कर सकता/ सकती है और खाता खोलने का फार्म भर सकता/ सकती है. सभी निवेशकों को निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं:

  • पहचान प्रमाण
  • पते का प्रमाण
  • पासपोर्ट आकार के फोटोग्राफ
  • पैन कार्ड (सभी व्यक्तियों, नाबालिगों, एचयूएफ इत्यादि के लिए).
  • करार
Q

3. क्या कोई डीमैट खाताधारक एक बैंक खाते की तरह, संयुक्त खाते "दोनों में से कोई एक या उत्तरजीवी" का संचालन कर सकते हैं?

नहीं. डीमैट खाता, बैंक खाते की तरह "दोनों में से कोई एक या उत्तरजीवी" आधार पर संचालित नहीं किया जा सकता. सभी खाते धारकों को संयुक्त रूप से सभी दस्तावेजों पर (डिलिवरी निर्देशों सहित) हस्ताक्षर करना चाहिए.

Q

4. क्या प्रत्येक निवेशक के लिए पूंजी बाजार में व्यापार करने के लिए डीमैट खाता खोलना अनिवार्य है?

चूंकि शेयर बाजारों में 99.5% निपटान डीमैट रूप होते हैं, प्रतिभूतियों की खरीद करने वाले किसी भी निवेशक को प्रतिभूतियां केवल डीमैट रूप में प्राप्त होंगी. अत: सक्रिय रूप से प्रतिभूतियों को खरीदने और बेचने वाले निवेशकों को डीमैट प्रतिभूतियों की डिलीवरी प्राप्त करने के लिए डिपॉजिटरी खाता खोलने की आवश्यकता होती है.

Q

5. क्या कोई व्यक्ति एक ही चयनित सीबीएस शाखा में अथवा अलग-अलग डीपी के पास एक (1) से अधिक डीमैट खाते खोल सकता है?

हां.;कोई भी व्यक्ति एक ही चयनित सीबीएस शाखा में अथवा अलग-अलग डीपी के पास एक (1) से अधिक डीमैट खाते खोल सकता है. किसी भी व्यक्ति के लिए, हमारी चयनित सीबीएस शाखा/शाखाओं (सेंट्रल बैक आफिस डीपी परिचालन अर्थात सीबीओडीपीओ से जुडी हुई) में अथवा किसी अन्य डीपी के पास खाते खोलने के लिए खातों की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है.

Q

6. डीमैट खाताधारक को उसका पता बदलने पर क्या करना चाहिए? क्या उसको प्रत्येक कंपनी को अलग-अलग मेल भेजने / लिखने की आवश्यकता है?

उसका पता बदल जाने की स्थिति में, उसे केवल पते में परिवर्तन के लिए आवश्यक प्रमाण के साथ शाखा डीपी को नए पते के बारे में सूचित करने की आवश्यकता है. जब शाखा डीपी, डिपॉजिटरी कंप्यूटर प्रणाली में नया पता दर्ज करेगा, तो यह स्वचालित रूप से उन सभी कंपनियों को चला जाएगा जिनके शेयर खाताधारक द्वारा रखे गए हैं.

Q

7. 'मार्केट ट्रेड' और 'ऑफ मार्केट ट्रेड' का क्या अर्थ है?

क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के माध्यम से किए गए किसी ट्रेड को ‘मार्केट ट्रेड’ कहा जाता है. इन ट्रेडों को स्टॉक एक्सचेंज में शेयर दलालों के माध्यम से किया जाता है. 'ऑफ मार्केट ट्रेड' वह होता है जिसे क्लियरिंग कॉर्पोरेशन को शामिल किए बिना, दो पक्षों के बीच सीधे किया जाता है. दो विकल्पों में से एक विकल्प का चयन करते हुए मार्केट ट्रेड और ऑफ मार्केट ट्रेड के लिए एक ही डिलिवरी निर्देश पर्ची का इस्तेमाल किया जा सकता है.

Q

8. क्या कोई निवेशक केवल एक डीपी के पास डीमैट खाता रखने के लिए ही प्रतिबंधित है?

Any trade settled through a clearing corporation is termed as the 'Market Trade'. These trades are done through stock brokers on a stock exchange.
'Off Market Trade' is one which is settled directly between two parties without the involvement of clearing corporation. The same delivery instruction slip can be used either for market trade or off-market trade by ticking one of the two options.

Q

9. खाता खोलने के फार्म में दिए गए 'स्थायी निर्देश' क्या हैं?

किसी भी बैंक खाते में, नकद/चेक के साथ 'भुगतान-इन' पर्ची प्रस्तुत होने पर ही खाते में जमा दिया जाता है. इसी तरह, डीमैट खाते में प्रतिभूतियों को प्राप्त करने के लिए ‘प्राप्ति इन’ फार्म प्रस्तुत किया जाता है. यद्यपि, निवेशकों की सुविधा के लिए, 'स्थायी निर्देश' की सुविधा दी गई है. यदि खाता धारक डीमैट खाता खोलने के समय पर स्थायी निर्देश के लिए 'हां' कहता हैं [या टिक करता है], तो उसे प्रतिभूतियां खरीदते समय हर बार ‘प्राप्ति इन’ पर्ची देने की जरूरत नही है.

Q

10. नामांकन की प्रक्रिया क्या है?

विधिवत भरा हुआ नामांकन फार्म (प्रारूप खाता खोलने के फार्म में दिया गया है) खाता खोलते समय शाखा डीपी को प्रस्तुत किया जाना चाहिए. इस फार्म पर खाताधारक, नामिती एवं दो गवाहों के हस्ताक्षर होने चाहिए, नामिती का पता और फोटोग्राफ अवश्य प्रस्तुत किया जाना चाहिए. (सीडीएसएल डीपी/ शाखा के पास खाता खोले जाने के मामले में नामिती का फोटोग्राफ आवश्यकता नहीं है) यदि खाता खोलने के समय नामांकन विकल्प का चयन नहीं किया गया है, तो इसे बाद में भी नामांकन फार्म प्रस्तुत करने से किया जा सकता है.

Q

11. ट्रांसमिशन का क्या फायदा है?

डीमैट्रलाइज होल्डिंगों के मामले में सब से बडा फायदा यह होता है कि डीमैट खाते में रखी सभी प्रतिभूतियों की ट्रांसमिशन औपचारिकताएं केवल शाखा डीपी के साथ बातचीत के द्वारा ही पूरी की जा सकती हैं, जबकि भौतिक (फिजिकल) प्रतिभूतियों के मामले में दावेदार को जारीकर्ता के साथ या उसके रजिस्ट्रार के साथ अलग से बातचीत करनी होती है.

Q

12. खाताधारक की मृत्यु के मामले में नामिती को प्रतिभूतियों का ट्रांसमिशन करने के लिए क्या प्रक्रिया है?

एकल धारक की मृत्यु के मामले में, प्रतिभूतियों के ट्रांसमिशन के उद्देश्य से, नामांकित व्यक्ति को एक विधिवत भरा हुआ ट्रांसमिशन फार्म, मृत्यु प्रमाणपत्र की नोटरी प्रमाणित प्रति तथा निर्धारित प्रारूप में एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा. इन दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद, डीपी प्रतिभूतियों को नामांकित व्यक्ति के खाते में ट्रांसमिट करेगा.

Q

13. डीमैट्रलाइजेशन का क्या अर्थ है?

डीमैट्रलाइजेशन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी निवेशक के भौतिक सर्टिफिकेटों को प्रतिभूतियों की संख्या के बराबर संख्या में इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदला जाता है तथा डीपी के पास खोले गए निवेशक के खाते में जमा किया जाता हैं.

सर्टिफिकेटों को डीमैट्रलाइज करने के उद्देश्य से, किसी निवेशक को सबसे पहले शाखा डीपी के पास एक खाता खोलना होगा और फिर डीमैट्रलाइजेशन अनुरोध फॉर्म [डीआरएफ], जो शाखा डीपी के पास उपलब्ध है, को भरकर सर्टिफिकेटों के डीमैट्रलाइजेशन के लिए अनुरोध करना होगा और उस फार्म को वास्तविक सर्टिफिकेटों साथ प्रस्तुत करना होगा. डीमैट के लिए सर्टिफिकेटों को शाखा डीपी को देने से पहले निवेशक यह सुनिश्चित करेगा कि सर्टिफिकेटों के उपर "डीमैट्रलाइजेशन के लिए समर्पण" चिह्नित करके उन्हें विरूपित कर दिया गया है.

Q

14. क्या कोई व्यक्ति किसी भी शेयर सर्टिफिकेट को डीमैट्रलाइज करा सकता हैं?

कोई व्यक्ति केवल उन सर्टिफिकेट को डीमैट्रलाइज करा सकता है, जो पहले से ही उसके नाम पर पंजीकृत है तथा एनएसडीएल या सीडीएसएल में डीमैट्रलाइजेशन के लिए स्वीकृत प्रतिभूतियों की सूची में ह

Q

15. शेयर सर्टिफिकेटों को विरूपित करने से पहले डीमैट खाताधारक को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

उसे यह अवश्य सुनिश्चित करना चाहिए कि वह डीमैट्रलाइजेशन के लिए उपलब्ध है. उसे अपने शाखा डिपॉजिटरी भागीदार के पास इस बात की जाँच अवश्य कर लेनी चाहिए कि क्या आईएसआईएन (डिपॉजिटरी प्रणाली में प्रतिभूति के लिए कोड संख्या) सक्रिय किया गया है और डिपॉजिटरी द्वारा डीमैट्रलाइजेशन के लिए उपलब्ध है. यदि हाँ, तो उसे भौतिक सर्टिफिकेटों के साथ डीमैट अनुरोध फार्म प्रस्तुत करना चाहिए. उसे सर्टिफिकेट को विरूपित नहीं करना चाहिए (एनएसडीएल के मामले में, ग्राहक को सर्टिफिकेटों पर "डीमैट्रलाइजेशन के लिए समर्पण" रबर स्टांप लगाने की सलाह दी जाती है)

Q

16. डीमैट्रलाइजेशन प्रक्रिया में कितना समय लगता है?

डीमैट्रलाइजेशन में सामान्यत: लगभग 30 दिन लगते हैं.

Q

17. यदि शेयरों की डीमैट्रलाइजेशन में 30 दिन से अधिक का समय लगता हैं तो क्या होगा?

यदि डीमैट्रलाइजेशन की प्रक्रिया में 30 दिनों से अधिक का समय लगता है, तो सीबीओडीपीओ से संपर्क करने के बाद ग्राहक को उचित रूप से सूचित किया जाना चाहिए. यदि ग्राहक की कोई शिकायत है, तो उसे उस शिकायत को शाखा में करने की सलाह दी जाना चाहिए और उसकी एक प्रति सेंट्रल बैक ऑफिस डीपी संचालन (सीबीओडीपीओ) को दी जानी चाहिए

Q

18. क्या कोई निवेशक अपनी ऋण लिखतों, म्युचुअल फंड यूनिटों, सरकारी प्रतिभूतियों को भी अपने डीमैट खाते में को डीमैट्रलाइज कर सकता/ सकती है?

हां. वह डीमैट्रलाइज कर सकता/ सकती है और सभी तरह के निवेशों को एक ही डीमैट खाते में रख सकता / सकती हैं

Q

19. क्या उसकी इलेक्ट्रॉनिक होल्डिंग्स को वापस सर्टिफिकेट में परिवर्तित किया जा सकता है?

हां. यदि डीमैट खाताधारक अपनी प्रतिभूतियों को वापस भौतिक रूप में करवाना चाहता है, तो उसे उनके रीमैट्रलाइजेशन के लिए शाखा डीपी से अनुरोध करना चाहिए. रीमैट्रलाइजेशन वह होता है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक होल्डिंग्स को वापस सर्टिफिकेट में परिवर्तित किया जाता है. उसका शाखा डीपी उसके अनुरोध को सीबीओडीपीओ को अग्रेषित करेगा, जो उसके आवश्यक बकाया की पुष्टि करने के बाद एनएसडीएल/ सीडीएसएल को आगे अग्रेषित करेगा. एनएसडीएल/ सीडीएसएल रजिस्ट्रार को सूचित करेगी जो सर्टिफिकेट प्रिंट करेगा और उसे उसके पते पर भेजेगा.

Q

20. डीमैट खाताधारक(ओं) को डिलिवरी निर्देश पर्ची [डीआईएस] के संबंध में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

डीमैट खाता धारक को निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए (इन्हें शाखा डीपी द्वारा ग्राहक को सूचित किया जाना चाहिए) :

    • खाता धारक को डीआईएस बुक जारी करने के लिए शाखा डीपी से अनुरोध तथा सुनिश्चित करना चाहिए; शाखा डीपी को खुली हुई पर्ची जारी नहीं करनी चाहिएं.
    • यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डीआईएस संख्या पूर्व मुद्रित हैं और शाखा डीपी उसको डीआईएस बुक जारी की उससे पावती लेता है.
    • सुनिश्चित करें कि आपका खाता संख्या [ग्राहक आईडी] पहले से छपा है.
    • यदि डीमैट खाता एक संयुक्त खाता है, तो सभी संयुक्तधारकों को निर्देश पर्ची पर हस्ताक्षर करना चाहिए. यदि सभी संयुक्त धारकों ने हस्ताक्षर नहीं किया है, तो निर्देश निष्पादित नहीं किया जा सकता.
    • हस्ताक्षर की गई खाली डीआईएस किसी के भी पास अर्थात् ब्रोकर/सब-ब्रोकर/शाखा के स्टाफ के पास नही छोड़नी चाहिए.
    • जब आवश्यकता न हो तो डीआईएस बुक सुरक्षित जगह पर रखनी चाहिए.
    • यदि डीआईएस बुक में केवल एक ही प्रविष्टि की जाती है, तो उसमें शेष रिक्त स्थान काट देना चाहिए ताकि कोई दूसरा व्यक्ति उसका दुरुपयोग न कर सके.
    • कृपया लक्ष्य खाता आईडी स्वयं भरें, और डीआईएस में सभी विवरण भी स्वयं भरें.
Q

21. डिलिवरी निर्देश फार्म में दी गई 'निष्पादन की तारीख’ क्या है?

निष्पादन की तारीख वह तारीख है जिस पर प्रतिभूतियां वास्तव में आपके खाते से नामे होंगी. डिलिवरी निर्देश पर लिखी निष्पादन की तारीख, शाखा डीपी द्वारा डीबॉस सिस्टम [कंप्यूटर] में दर्ज की जाती हैं. जब इसे सीबीओडीपीओ द्वारा डीपीएम/ सीडीएसी में अपलोड किया जाता है, तो डिपॉजिटरी का सिस्टम तारीख को रिकॉर्ड करेगा और केवल उसी तारीख पर ग्राहक के खाते को नामे करेगा. ग्राहक उस तारीख के लिए जिस तारीख को वह अपने खाते से प्रतिभूतियों को नामे करना चाहता है, के लिए पहले से निर्देश जारी कर सकता है, परंतु उसका खाता केवल निष्पादन की तारीख पर ही नामे होगा.

Q

22. आगामी निष्पादन तारीख की डिलिवरी निर्देश पर्ची देकर कोई ग्राहक क्या लाभ उठा सकता है?

आगामी दिनांकित निर्देश देकर समयाभाव अथवा आखरी समय की भीड के कारण निर्देशों के गैर निष्पादन के जोखिम को कवर किया जा सकता है.

Q

23. क्या वह अलग-अलग स्वामित्व पैटर्न जैसे व्यक्तिगत स्वामित्व प्रतिभूतियों और उसकी/उसके पत्नी/ पति के साथ स्वामित्व प्रतिभूतियों के रूप में अपनी प्रतिभूतियों के लिए एकल खाता खोल सकता हैं?

नहीं. डीमैट खाता उसी स्वामित्व पैटर्न में खोला जाना चाहिए जिसमें प्रतिभूतियों को वास्तविक रूप में रखा गया है उदाहरण के लिए यदि एक शेयर सर्टिफिकेट उसके व्यक्तिगत नाम पर है और दूसरा सर्टिफिकेट उसकी पत्नी के साथ संयुक्त नाम पर है, तो दो अलग अलग खाते खोलने होंगे.

Q

24. किसी व्यक्ति को क्या करना चाहिए यदि उसके वास्तविक सर्टिफिकेट नामों के उसी संयोजन में है, लेकिन नामों का क्रम अलग है? अर्थात कुछ सर्टिफिकेटों में पति पहले धारक के रूप में है और पत्नी दूसरे धारक के रूप में तथा दूसरे सर्टिफिकेटों में पत्नी पहले धारक के रूप में है और पति दूसरे धारक के रूप में? (उदाहरण नीचे दिया गया है)

ऐसे मामले में वह व्यक्ति, खाताधारकों के रूप में पति एवं पत्नी + बेटी के साथ केवल एक ही खाता खोल सकता/ सकती है और उसी खाते में डीमैट्रलाइजेशन के लिए नामों के विभिन्न क्रम वाले प्रतिभूति सर्टिफिकेटों को लॉज कर सकता/ सकती है. उसे एक अतिरिक्त फार्म भरना होगा जिसे "स्थानांतरण सह डीमैट" फार्म कहा जाता है. यह नामों के क्रम में परिवर्तन करने तथा प्रतिभूतियों के डीमैट्रलाइजेशन में उसकी सहायता करेगा.

Q

25. क्या वह अपने बैंक खाते के विवरण बदल सकता/सकती हैं?

हां. चूंकि उसकी बकाया प्रतिभूतियों पर डिपोजिटरी प्रणाली मौद्रिक लाभ का भुगतान उसके द्वारा खाता खोलने के समय दिए गए बैंक खाते के विवरण के अनुसार किया जाता है, उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके बैंक खाते के विवरण में बाद में किए गए किसी भी परिवर्तन को तुरंत डीपी शाखा सूचित किया गया है.

Q

26. ग्राहक अपने लाभांश/ ब्याज या अन्य नकदी लाभों को कैसे प्राप्त करेगा?

संबंधित कंपनी, लेखाबंदी की तारीख/ रिकॉर्ड तारीख को लाभार्थी धारकों तथा उनकी होल्डिंग्स का ब्यौरा एनएसडीएल/ सीडीएसएल से लेती है. कंपनी द्वारा निवेशकों को भुगतान ईसीएस (इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस) सुविधा अथवा वारंट जारी कर, जिस पर ग्राहक के बैंक खाते का विवरण मुद्रित होता है, के माध्यम से किया जाएगा. बैंक खाते का विवरण वह होगा, जो ग्राहक ने अपने खाते खोलने के फार्म में उल्लेख किया होगा या उसके बाद बदलवाया होगा.

Q

27. ग्राहक को उसके बोनस शेयर या अन्य गैर नकदी लाभ कैसे मिलेगा?

संबंधित कंपनी लेखाबंदी की तारीख/ रिकॉर्ड तारीख को लाभार्थी धारकों तथा उनकी होल्डिंग्स का ब्यौरा एनएसडीएल/ सीडीएसएल से लेती है. कंपनी द्वारा निवेशकों को भुगतान ईसीएस (इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस) सुविधा अथवा वारंट जारी कर, जिस पर ग्राहक के बैंक खाते का विवरण मुद्रित होता है, के माध्यम से किया जाएगा. बैंक खाते का विवरण वह होगा, जो ग्राहक ने अपने खाते खोलने के फार्म में उल्लेख किया होगा या उसके बाद बदलवाया होगा.

Q

28. निवेशक इसकी पुष्टि कैसे करेगा कि बोनस/ अधिकार लाभ खाते में जमा हो गया है?

जारीकर्ता/ उनके आर&टी एजेंट द्वारा बोनस/ अधिकार लाभ के लिए एक आवंटन एडवाइस भेजी जाएगी. शाखा डीपी द्वारा दी गई लेनदेन विवरण में, खाते में जमा किए गए बोनस/ अधिकार लाभ को भी दर्शाया जाएगा. एडवाइस में दिखाई गई मात्रा तथा लेनदेन विवरणी में दर्शाई गई मात्रा एक समान होनी चाहिए.

Q

29. क्या ग्राहक डीमैट्रलाइज प्रतिभूतियों को गिरवी रख सकते हैं?

हां. वास्तव में, वास्तविक प्रतिभूतियों को गिरवी रखने की तुलना में डीमैट प्रतिभूतियों को गिरवी रखना आसान और अधिक फायदेमंद है.

Q

30. इलेक्ट्रॉनिक प्रतिभूतियों को गिरवी रखने के लिए ग्राहक को क्या करना चाहिए?

प्रक्रिया निम्नानुसार है:

  • ग्राहक (गिरवीकर्ता) तथा ऋणदाता (गिरवीदार) दोनों के डीमैट खाते होने चाहिएं;
  • ग्राहक, गिरवी रखी जा रही प्रतिभूतियों के विवरण मानक प्रारूप में अपने शाखा डीपी को प्रस्तुत करते हुए गिरवी आरंभ करता है;
  • गिरवीदार अपने डीपी के माध्यम से अनुरोध की पुष्टि करता है;
  • इस प्रकिया के पूरा हो जाने पर, प्रतिभूतियां गिरवी हो जाती हैं.
  • डिपोजिटरी प्रणाली के बाहर गिरवीकर्ता और गिरवीदार के बीच सभी वित्तीय लेनदेन सामान्य प्रक्रिया के अनुसार चलते रहते है.
  • हां. ग्राहक डीमैट्रलाइज कर सकता है और सभी तरह के निवेशों को एक ही डीमैट खाते में रख सकता हैं.
Q

31. ग्राहक अपने ऋण की अदायगी के बाद गिरवी को कैसे छुडवा सकते हैं?

ग्राहक ऋण को चुकाने के बाद, वह निर्धारित प्रारूप में शाखा डीपी को निर्देश देते हुए गिरवी को छुडवाने के लिए अनुरोध कर सकते हैं. पुनर्भुगतान प्राप्त करने पर गिरवीदार गिरवी को छोडने के लिए तदनुसार अपने डीपी को निर्देश देगा.

Q

32. क्या गिरवीदार का खाता किसी अलग डीपी के पास हो सकता है?

हां. गिरवीदार का खाता एनएसडीएल या सीडीएसएल के अलग डिपोजिटरी भागीदार के पास हो सकता है अर्थात दोनों डीपी उसी डिपॉजिटरी के होने चाहिएं.

Q

33. क्या ग्राहक गिरवी प्रतिभूतियों को बदल सकता है?

हाँ, यदि गिरवीदार [ऋणदाता] इससे सहमत हैं, तो ग्राहक गिरवी प्रतिभूतियों को बदल सकता है.

Q

34. गिरवी प्रतिभूतियों पर कॉर्पोरेट लाभ कौन प्राप्त करेगा?

गिरवी प्रतिभूतियां, गिरवीकर्ता के खाते में केवल गिरवीदार के पक्ष में अवरुद्ध रहती हैं. गिरवीकर्ता (ग्राहक) को सभी कॉर्पोरेट लाभ प्राप्त होते रहेंगे.

Q

35. यदि डीपी दिवालिया हो जाता है या काम करना बंद कर देता है तो क्या होगा?

हमारा बैंक एक प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंक है और भारत सरकार का उपक्रम है. यदि किसी दुर्लभ स्थिति में बैंक दिवालिया होता है अथवा आपरेशन बंद करता है, तो निवेशकों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी. ऐसी स्थिति में, निवेशक को विकल्प दिया जाता है वह या तो प्रतिभूतियों को नए डीपी के पास हस्तांतरण कर सकता है या फिर वह प्रतिभूतियों को रीमैट्रलाइज करा सकता है.

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