सामान्य बीमा पूछे जाने वाले प्रश्न

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आस्तियों को बचाएं.

जनरल इंश्योरेंस

सामान्य बीमा पूछे जाने वाले प्रश्न

Q

बीमा क्या है ?

हमारे दैनिक जीवन में हम कई जोखिमों का सामना करते हैं. इनमें से कुछ के कारण वित्तीय हानि भी सहनी पड़ती है. बीमा इन वित्तीय हानियों से सुरक्षित रखने का एक माध्यम है. बीमा कंपनी भुगतान (प्रीमियम) के पेटे, आपकी वित्तीय हानियों की क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी लेगी.

Q

सामान्य बीमा क्या है ?

मानव जीवन के अलावा किसी भी चीज को बीमाकृत करवाना सामान्य बीमा कहलाता है. उदाहरण के लिए घर और संपत्तियों को आग और चोरी या वाहनों को दुर्घटनागत क्षति या चोरी से बचाने के लिए उनका बीमा करना. दुर्घटना से लगी चोट या बीमारी हेतु हॉस्पिटलाइजेशन और सर्जरी को भी बीमाकृत किया जा सकता है. किसी कानून के तहत अन्य के लिए आपकी देयताओं को भी बीमाकृत किया जा सकता है और मोटर तृतीय पक्ष बीमा जैसे कुछ मामलों में यह अनिवार्य है.

Q

कोई बीमा क्यों करवाए ?

बीमा करवाने का एक मुख्य कारण अपनी संपत्तियों और आस्तियों को वित्तीय हानि से सुरक्षित करना है. जब कोई संपत्ति अर्जित और संचित करता है तो उसकी सुरक्षा आवश्यक हो जाती है. कानून के अनुसार भी हमें कुछ देयताओं के लिए बीमा कराना आवश्यक है अर्थात यदि हम किसी अन्य व्यक्ति को हानि पहुंचाते हैं तो वह व्यक्ति क्षतिपूर्ति का हकदार होगा. यह सुनिश्चित करने के लिए कि हम उस क्षतिपूर्ति का वहन कर सकें, कानून हमारे लिए देयता बीमा लेना आवश्यक कर देता है जिससे कि क्षतिपूर्ति का भुगतान करने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी को हस्तांतरित कर दी जाए.

Q

सामान्य बीमा किसे लेना चाहिए ?

जो भी किसी आस्ति का स्वामी है वह उसे आग या चोरी या अन्य कारणों से होने वाली हानि से सुरक्षित रखने के लिए बीमा खरीद सकता है. हम में से हर कोई अपने और अपने आश्रितों को हॉस्पिटलाइजेशन और वैयक्तिक दुर्घटना पॉलिसियों के माध्यम से स्वस्थ और सुखी बनाना सुनिश्चित कर सकता है. पॉलिसी खरीदने के लिए व्यक्ति वित्तीय हानियां होने पर उन्हें वहन कर सकने योग्य होना चाहिए. यह बीमाकृत हित कहलाता है.

Q

पॉलिसियां कितने प्रकार की होती हैं ?

अधिकतर बीमा पॉलिसियां वार्षिक होती हैं - अत: वे एक वर्ष चलती हैं. कुछ पॉलिसियां लंबी अवधि के लिए होती हैं जैसे आवास हेतु बीमा और कुछ कम अवधि की होती हैं जैसे माल सामान के यातायात के लिए या विदेश यात्रा के दौरान आकस्मिक चिकित्सकीय जांच हेतु बीमा.

Q

मुझे कितने का बीमा करना चाहिए ?

आप जितनी राशि का बीमा करवाते हैं वह बीमाकृत राशि कहलाती है. सामान्य तौर पर पॉलिसी में आस्ति का मूल्य अर्थात्‌ बीमा कराते समय उसका बाजार मूल्य या आस्ति के गुम होने या नष्ट होने पर उसे बदलने पर लगने वाली लागत कवर होनी चाहिए. प्रीमियम बीमाकृत राशि पर निर्भर करेगा.

Q

क्या मैं दो पॉलिसियां ले सकता हूं और दोनों के अंतर्गत दावा प्राप्त कर सकता हूं ?

क्षतिपूर्ति कवर (जो वास्तविक हानि की क्षतिपूर्ति करने के लिए है) यथा एक पॉलिसी जो संपत्ति को कवर करती है के मामले में, यदि संपत्ति के लिए दो पॉलिसियां प्रभाव में हैं तो हानि का वहन दोनों पॉलिसियों के अंतर्गत साझा रूप में किया जाता है. किसी भी मामले में बीमित द्वारा वहन की गई वास्तविक वित्तीय हानि से अधिक राशि नहीं प्रदान की जाएगी. इसके अलावा, लाभ पॉलिसियों जैसे वैयक्तिक दुर्घटना पॉलिसी जहां वास्तविक हानि पर विचार किए बिना एक निर्धारित क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाता है, एक व्यक्ति एक से अधिक पॉलिसियां प्राप्त कर सकता है.

Q

किस आधार पर दावे का भुगतान किया जा सकता है ?

क्षतिपूर्ति पॉलिसियों में, बीमाकृत राशि दावे की अंतिम सीमा होती है और सामान्य तौर पर पॉलिसी की अवधि हेतु लागू होती है. हालांकि कुछ पॉलिसियों में, पॉलिसी की बची हुई अवधि के लिए आनुपातिक प्रीमियम का भुगतान करके बीमाकृत राशि की पुनर्बहाली करने की अनुमति है. वास्तविक दावा बिल जैसे दस्तावेजों द्वारा विधिमान्य वित्तीय हानि की वास्तविक सीमा तक होगा. यदि संपत्ति का बीमा कम किया गया है तो बीमित को हानि का उचित दर से आनुपातिक वहन करना होगा. पॉलिसी अवधि में एक से अधिक बार दावा किया जा सकता है लेकिन बीमाकृत राशि सामान्य तौर पर पॉलिसी अवधि हेतु निर्धारित सीमा के अधीन होगी जब तक कि पॉलिसी की पुनर्बहाली न की गई हो.

आज कल स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियां जो अस्पतालीय लागत को कवर करती हैं उनमें नकदीरहित दावे के निपटान की व्यवस्था है. इस व्यवस्था के तहत आपको अस्पताल में चिकित्सा हेतु भुगतान करने एवं बाद में व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए दावा प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं रहती. बीमा कंपनी के पास सेवा प्रदाता होते हैं जिन्हें तृतीय पक्ष प्रशासक (टीपीए) कहा जाता है जो अस्पतालों के साथ संपर्क रखते हैं और आपकी पॉलिसी और कवरेज की शर्तों के अनुसार आपकी चिकित्सा हेतु भुगतान करते हैं.

Q

प्रीमियम भुगतानों की आवधिकता क्या है ?

अधिकतर सामान्य बीमा पॉलिसियां वार्षिक होती हैं और प्रीमियम का भुगतान अग्रिम किया जाना होता है. प्रीमियम का भुगतान किए बिना किसी जोखिम कवर की शुरुआत नहीं होगी. कुछ लंबी अवधि की मीयादी पॉलिसियों में कंपनियों के पास आवधिक रूप से प्रीमियम के संग्रहण की सुविधा होती है.

Q

अलग-अलग व्यक्तियों को अलग-अलग प्रीमियम क्यों देना पड़ता है ?

प्रीमियम की गणना आप किस सीमा और किस प्रकार का कवर प्राप्त करना चाहते हैं, उस पर निर्भर करती है. उच्च बीमाकृत राशि के लिए उच्च दर पर प्रीमियम का भुगतान करना होगा. इसी प्रकार उच्च जोखिम होने पर भी अधिक प्रीमियम का भुगतान करना होगा. उदाहरण स्वरूप स्वास्थ्य बीमा हेतु एक ही बीमाकृत राशि के लिए वृद्ध व्यक्ति को अधिक प्रीमियम का भुगतान करना होगा. कभी-कभी जोखिम के स्थान के आधार पर भी जोखिम अधिक रहता है जैसे जिन स्थानों पर दुर्घटनाएं अधिक होती हैं वहां वाहन बीमा. इस प्रकार, जोखिम के प्रकार और गंभीरता के अनुसार प्रीमियम में अंतर होगा.

Q

यदि मैं पॉलिसी खरीदता हूं और दावा नहीं करता तो वह हानि होगी. तो मैं बीमा क्यों खरीदूं ?

सामान्य बीमा बचत या निवेश रिटर्न के उद्देश्य से नहीं किया जाता. यह सुरक्षा हेतु होता है. आप जो भुगतान करते हैं वह जोखिम से सुरक्षा के लिए होता है. इसे इस रूप में देखना कि इससे कोई रिटर्न प्राप्त होगा. यह दृष्टिकोण गलत है क्योंकि एक संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए लाखों का भुगतान किया जा सकता है फिर कुछ सौ रुपए तो कुछ भी नहीं है.

Q

यदि दावे के साथ कोई समस्या हो तो मैं क्या करूं ?

सबसे पहले आप कंपनी से लिखित संपर्क करें और उन्हें उचित रूप से उत्तर देने का पर्याप्त समय दें. यदि वे उत्तर नहीं देते या वह उत्तर संतोषजनक नहीं है तो आप उपयुक्त न्याय माध्यम का प्रयोग कर सकते हैं. रु. 20 लाख के मूल्य तक के व्यक्तिगत बीमा के संबंध में शिकायतों हेतु आप अपने क्षेत्र के बीमा लोकपाल का संपर्क कर सकते हैं.

लोकपाल की तकनीकी टीम मामले की योग्यता जांचेगी और अवार्ड (निर्णय) देगी. यदि आप लोकपाल के निर्णय से अप्रसन्न हैं तो आप उपभोक्ता न्यायालय में जा सकते हैं.

Q

भारत में सामान्य बीमा का विनियमन कौन करता है ?

बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) एक स्वतंत्र, सांविधिक एजेंसी है जो भारत में बीमा और पुनर्बीमा उद्योग के विनियमन और प्रचार का कार्य करती है. यह भारत सरकार द्वारा संसद में पारित अधिनियम बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 द्वारा स्थापित की गई है. एजेंसी का मुख्यालय हैदराबाद, तेलंगाना में है जो 2001 में दिल्ली से स्थानांतरित हो गया है.

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